मुक्तक 15 अप्रैल 2020 भारत बंद के दौरान
झील सी गहरी आँखे लुभाती रहे
जुल्फ रेशम सी गजरे सजाती रहे
होंठ मूंगे सी लाली रहे उम्रभर
फूल कलियों सी तू मुस्कराती रहे ।।
हाल ये दिल के तराने सुनाया करो
बात यूँ बेबजह न घुमाया करो
तेरे चेहरे पे खामोशी जँचती नही
मौन लफ़्ज़ों से न बुदबुदाया करो
तीर नयनों से यूँही चलाया करो
नाम लेकर न मुझको बुलाया करो
जर्रा जर्रा खफा है मेरे शहर का
न भरी भीड़ में आजमाया करो
रूपेश धनगर
मथुरा
9410490520
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