भारत की बेटियो मेरी बात मान लो
तिरछी नजर उठे खंजर को तान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
ले चल पड़ो मसाले करने नए उजाले
हाथों की छोड़ मेहंदी ले लो करो में भाले
कर भेड़ियों का मर्दन जिद अपनी ठान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
निंद्रा में जग हमेशा नारी छली गई
कांटों से हुई जुदा वो मसली कली गई
बहरूपिये मुखोटे न वांगवा मान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
युग युग की ये कहानी सदियों से भी पुरानी
पग पग पे मुश्किल थी सीता हो देवज्ञानी
मिथकों से आगे निकलो विज्ञान ज्ञान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
दहलीज की रुकावट घुंघट की बंदिशें
सब हाशिए पर ठेलो जितनी हो रंजिशें
कर गर्व ही खुद ही पर अभिमान मान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
करती सृजन रही हो मातृत्व धारकर
बन जाओ अब तो काली दुष्टों को मारकर
तुम कम नहीं किसी से संबिधान जान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
रूपेश धनगर मथुरा
9410490520
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