महँगाई
अब तो मित्रो प्राणों पर बन आई है ।
सर से ऊँची बेदर्दी महँगाई है ।
दाम तेल के सौ रुपया से ऊपर है ।
महामारी में धेला नही कमाई है ।
विधालय भी बंद पड़े हैं सालों से
पर मधुशालाओ पे रंगत छाई है ।
गयीं नौकरी हाथ धरे बैठे घर में
नेताजी की रैली में अंगड़ाई है ।
अस्पताल में प्राण बायु की किल्लत है
अब तो यारो मुश्किल हुई दवाई है ।
झूठे वादे ,बात फरेबी है मनकी
ऐशे लगती जैसे बालूशाही है ।
कल परसों जो डायन डायन कहते थे ।
अब रिश्ते में उनकी ही भौजाई है ।
रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520