मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

महंगाई

महँगाई

अब तो मित्रो प्राणों पर बन आई है ।
सर से ऊँची बेदर्दी महँगाई है ।



दाम तेल के सौ रुपया से ऊपर है ।
महामारी में धेला नही कमाई है ।

विधालय भी बंद पड़े हैं सालों से
पर मधुशालाओ पे रंगत छाई है  ।

गयीं नौकरी हाथ धरे बैठे घर में
नेताजी की रैली में अंगड़ाई है ।


अस्पताल में प्राण बायु की किल्लत है
अब तो यारो मुश्किल हुई दवाई है ।

झूठे वादे ,बात फरेबी है मनकी
ऐशे लगती जैसे बालूशाही है ।


कल परसों जो डायन डायन कहते थे ।
अब रिश्ते में उनकी ही भौजाई है ।

रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520

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