धनगर (इतिहास)
अर र र र धनगर अलबेली, कॉम भाग ते पाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है,इतिहास कोन दोहराबेगो
संगम, मौर्य, पल्ल्वो ने ,भारत में झंडे गाड़ दिए
तलवारो के दम पे हमने, अच्छे अच्छे फाड़ दिए
अर र र र अब “चंद्रगुप्त” सो वीर कहां ते लावेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो
कटक अटक तक बोली तूती, ऐशे वीर “मल्हार” हुए
पूरे भारत चौथ ऊंघाई, ऐसे सूबेदार हुए
अर र र र जाके नाम सुने तेई“ईश्वरसिंह”मर जाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो
मुगलों की छाती पे चढ़कर,धर्मो के सत्कार किए
मातु “अहिल्याबाई” ने मठ मंदिर के उद्धार किए
अर र र र अब “सोमनाथ” और “काशी” कोन बनाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो
“तानसेन” और “कालीदास” की महिमा कोन बखान करें
राग शहाना पे नाचे और मेघदूत का गान करें
अर र र र अब “कनकदास” संत कहां से आवेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो
श्याम रंग और बदन गठीला,सानी ना कद काठी का
हार गई धनगर से दुनिया ,तोड़ मिला ना लाठी का
अर र र र अब “रूपेश धनगर छैला”कलम चलाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो
कवि/सर्वाधिकार सुरक्षति
रूपेश धनगर,मथुरा
Mo-9410490520
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