ये दिल कितना तडपा है
इस बैचैनी मै आँखों मै
कितना मातम बरपा है
भीगी -भीगी पलकों पर
गम के काले बादल छाये
बिरहा की अग्नि जलकर
मेरा तन झुलसा जाये
बेदर्दी मौसम क्यों इतना खफा -खफा है
चैन बिना ------------------------
सूना- सूना जग लगता है
पीर पहाड़ो सी होकर
और बेरूखा कर जाती है
मुझको तन्हाई छूकर
इस पल मै क्यों सब कुछ धुँआ -धुँआ है
चैन बिना बैचैन .............................
दिन जाने कैसे गुजरे
राते करबट बदल-बदल
सहमा -सहमा रहकर के
सिकुड़ गया है अन्तस्थल
इस गम की वारिष का अपना अलग मजा है
चैन बिना --------------------------
रुपेश धनगर
मथुरा
९६५४४४११८६
चैन बिना --------------------------
रुपेश धनगर
मथुरा
९६५४४४११८६
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