हर तन में खुशिया जगे,हर पल हर दिन हर्ष I
सव दुबिधा का अंत कर ,आये नूतन बर्ष II 1
शीत लहर नित बह रही,दिनकर हुए निढाल I
नभ,जल,थल,का शीत से,हुआ हाल बेहाल II 2
नये साल में आपको,मिले नयी सौगात I
नये नये अबसर मिले, नयी नयी हो बात II 3
नयी नवेली रात हो,नया नया दिनमान ।
दिल मे उपवन से खिले,फूलो सी मुस्कान ।।
नया कहेंगे हम जिसे, वही पुराना होय ।
दिन गुजरे रजनी ढ़ले, नित जागे नित सोय।। 5
नभ में कोहरा छा गया ,शीत हुआ बलवान I
ठिठुर ठिठुर कर कट रहा,निर्धन का दिनमान II 6
मोटी ऊनी चादरें, बचा रही है गाथ I
महबूबा सा लग रहा,अब विस्तर का साथ II 7
तापमान है शून्य पर,ठिठुर रहे है लोग I
सर्दी खांसी ज्वर अधिक, लगे शरद से रोग II 8
अब सत्ता से कीजिये,महंगाई पर बात ।
नए साल में नयी नयी ,देदे कुछ सौगात ।। 9
मुद्दों की तू बात कर ,दुखती नब्ज टटोल ।
इधर उधर में क्या रखा,अन्तस् के पट खोल ।। 10
मनकी बातें खोखली,करो काम की बात ।
निर्धन को कांदा नही,धन बल को खैरात ।। 11
कंपे फूस की झोपड़ी,तूफानी बरसात ।
ठिठुरन में बेबस कटी, शरद पूस की रात ।। 12
नये साल में छा गयी,अधरों पर मुस्कान ।
गौरी डूबा जश्न में , कर कर मदिरा पान ।। 13
यार सजाई महफिले,देख रह गया दंग ।
सुध बुध भूले बदन की,उड़ा रातभर रंग ।। 14
बारह बजते ही चला, संदेशों का दौर ।
प्रियजन को देने लगे,हर पल का सिरमौर ।। 15
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