०१/१२/२०१९ रविबार
कुण्डलिया निवेदित सादर समीक्षार्थ
मानव बना पिशाच सम इस बसुधा का भार
जग जननी से कर रहा हर पल अत्याचार
हर पल अत्याचार बड गयी है बेशर्मी
गले फूल के हार पहनते है दुष्कर्मी
कह धनगर पछताय छूट अब पाए दानव
चंद कनक की दमक दैत्य बन जाता मानव
रुपेश धनगर मथुरा
9410490520
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