शनिवार, 13 नवंबर 2021

निजीकरण

निजीकरण 
              ब्रज लोक गीत
           (25/01/2021)

निजीकरण की मंडी,बिक रहयो ,भारत देश हमारौ 
इन भक्तन नै बादर फ़ारो

बढ़ती जाय रही पीर,जिगर कौन करें निपटारौ

इन भक्तन ने बादर फारौ 

विद्यालय गए निजीकरण में,मोटी फीस बढामें 
निर्धन कू न मिले पढ़ाई,दर दर ठोकर खामे 
जान बूझकर पड़े नरक में,अपनो जन्म बिगारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ


पढ़बे लिखबे नाय मिले, बंधुआ मजदूर बनोगे
शोषण,अत्याचार यातना ,नित नई रोज सहोगे
करो गुलामी पस्त रहोगे, मिले नही छुटकारौ

इन भक्तन ने बादर फारौ

पूत अमीरों के सुख साधन,बाँट देश के लेंगे
तेरी नींद हराम,चाम भी तन से खिंचवा लेंगे 
जिधर मिलोगे ,दुमे हिलाते कर दें नाश तुम्हारौ

इन भक्तन ने ......................

अंधभक्त बजाय रहे ताली,तन मन की सुध भूले
घर में दरिया ,दार मिले ना,बुझे पड़े है चूले
गयी भुखमरी फैल देश मे,अब भट्टा बैठारो

इन भक्तन ने  बादर फारौ


निजीकरण को दमन करौ, मिलकर आवाज उठाओ
गूंगी बहरी सरकारों के पर्दे 
आज हिलाओ
नाय जगे तौ भरी दुपहरी ,चमके  चंदा तारौ

इन भक्तन ने बादर फारौ

बढ़ती जाय रही पीर जिगर की 
कौन करे निपटारौ

निजीकरण की मंडी बिक रह्यो ,भारत देश हमारौ 
इन भक्तन ने बादर फारौ

रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520

किसान धरने पर

ब्रज लोक गीत
          (04/01/2021)

दोय महीना से दिल्ली बॉर्डर पे बैठे हलधारी ।
नाय बापस ले कानून,राज बेदर्दी न को भारी ।

भारत सबरो बंद,दुबक रहे घर मे नर नारी ।
लाये काले कानून देश मे निष्ठुर सरकारी ।
ना चर्चा,कोई बहस करी सड़यन्त्री तैयारी ।

नाय वापस.....................

सुनके खबर अन्नदाता को,हियो बोल गयो ।
छीने निवाले पुस्तन के,दिल्ली तक ढोल गयो ।
सब भये इकट्ठे पंच, जुट गई सारी सरदारी ।

नाय बापस .......................

मौन प्रदर्शन धरना रैली,हलधर ने कर ली ।
पानी की बौछारें सीधी ,सीने में भर ली ।
सर्दी न कि ठिठुरी रात ,झुकी नाय इनकी खुद्दारी ।
नाय बापस ले .....................

 हक्क हकूक कू लामबंद,छोड़ी खेती बाड़ी
कर दई दिल्ली जाम,साथ महिला है गई ठाड़ी 
कंहू छुप गयो चौकीदार ,देख लई सब चौकीदारी 

नाय बापस ........................


कैसो है अन्याय,अडिंग है कैसे अन्यायी
मुँह पर मीठे बोल,रूप शैतानी परछाई
चेनल सब गूंगे भये,देश मे कैसी लाचारी 

नाय बापस ले ..................


रूपेश धनगर ,मथुरा
मो.9410490520