ब्रज लोक गीत
(04/01/2021)
दोय महीना से दिल्ली बॉर्डर पे बैठे हलधारी ।
नाय बापस ले कानून,राज बेदर्दी न को भारी ।
भारत सबरो बंद,दुबक रहे घर मे नर नारी ।
लाये काले कानून देश मे निष्ठुर सरकारी ।
ना चर्चा,कोई बहस करी सड़यन्त्री तैयारी ।
नाय वापस.....................
सुनके खबर अन्नदाता को,हियो बोल गयो ।
छीने निवाले पुस्तन के,दिल्ली तक ढोल गयो ।
सब भये इकट्ठे पंच, जुट गई सारी सरदारी ।
नाय बापस .......................
मौन प्रदर्शन धरना रैली,हलधर ने कर ली ।
पानी की बौछारें सीधी ,सीने में भर ली ।
सर्दी न कि ठिठुरी रात ,झुकी नाय इनकी खुद्दारी ।
नाय बापस ले .....................
हक्क हकूक कू लामबंद,छोड़ी खेती बाड़ी
कर दई दिल्ली जाम,साथ महिला है गई ठाड़ी
कंहू छुप गयो चौकीदार ,देख लई सब चौकीदारी
नाय बापस ........................
कैसो है अन्याय,अडिंग है कैसे अन्यायी
मुँह पर मीठे बोल,रूप शैतानी परछाई
चेनल सब गूंगे भये,देश मे कैसी लाचारी
नाय बापस ले ..................
रूपेश धनगर ,मथुरा
मो.9410490520
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