निजीकरण
ब्रज लोक गीत
(25/01/2021)
निजीकरण की मंडी,बिक रहयो ,भारत देश हमारौ
इन भक्तन नै बादर फ़ारो
बढ़ती जाय रही पीर,जिगर कौन करें निपटारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ
विद्यालय गए निजीकरण में,मोटी फीस बढामें
निर्धन कू न मिले पढ़ाई,दर दर ठोकर खामे
जान बूझकर पड़े नरक में,अपनो जन्म बिगारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ
पढ़बे लिखबे नाय मिले, बंधुआ मजदूर बनोगे
शोषण,अत्याचार यातना ,नित नई रोज सहोगे
करो गुलामी पस्त रहोगे, मिले नही छुटकारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ
पूत अमीरों के सुख साधन,बाँट देश के लेंगे
तेरी नींद हराम,चाम भी तन से खिंचवा लेंगे
जिधर मिलोगे ,दुमे हिलाते कर दें नाश तुम्हारौ
इन भक्तन ने ......................
अंधभक्त बजाय रहे ताली,तन मन की सुध भूले
घर में दरिया ,दार मिले ना,बुझे पड़े है चूले
गयी भुखमरी फैल देश मे,अब भट्टा बैठारो
इन भक्तन ने बादर फारौ
निजीकरण को दमन करौ, मिलकर आवाज उठाओ
गूंगी बहरी सरकारों के पर्दे
आज हिलाओ
नाय जगे तौ भरी दुपहरी ,चमके चंदा तारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ
बढ़ती जाय रही पीर जिगर की
कौन करे निपटारौ
निजीकरण की मंडी बिक रह्यो ,भारत देश हमारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ
रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520
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