शनिवार, 22 जनवरी 2022

चुनावी गीत 2022

चुनावी गीत 

ब्रज भाषा लोकगीत  की प्रस्तुति 
रुपेश धनगर मथुरा

धनगर भैया विनती कर रहे, यू पी की सरदारी ते ।
सोच ,समझके वोट करो तो,बचे रहो दुश्वारी ते ।।
 
घर घर में यूं पी की जनता,महंगी बिजली कू रोवे
मीठो पानी मिल नाय पायो, मैया मूढ़न पे ढोबे
बंदर काट रहे चौड़े में,   दहशत में है नर नारी
छुट्टा सांड चरें खेतन में, उजड़ रही खेती वाडी
खेत बचाने कौ मौकों है, कन्हू आज हलधारी ते
सोच समझके वोटिंग करियो,,,,,,,,,,

गौशालाएं चले नाम की, गैया खेतन में डोले 
लाश ने ते गंगा पट जाबे,झूठ पुलिंदा के खोले 
अत्याचार बढे बिटिया ने पे,थाने में जल रही नारी
राया,सुरीर,उन्नाव,हाथरस, जुर्म सहे इन ने भारी
आंखन से जलधार, रोय रही हूकभरी सिसकारी ते
सोच समझकर वोटिंग करियो,,,,,,,,,,,,,,

लखनऊ से आदेश करें पर,देखो इनकी चतुराई 
धनगर भटक रहें सड़कन पे, बहरी सरकार न सुनपाई
चुन चुन के mla,mp, मंत्री बन कुर्सी हथियाई
विरोध प्रदर्शन धरना रैली,कोई काम नही आई
कंश राज में dm,cm, छोटे है पटवारी ते 
सोच समझके बोटिंग करियों ,दूर रहो दुश्वारी ते ।



मौलिक एव सर्वाधिकार सुरक्षित
कवि/लेखक
रुपेश धनगर मथुरा
9410490520

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