मंगलवार, 3 नवंबर 2020
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020
भारत की बेटियों
भारत की बेटियों
भारत की बेटियो मेरी बात मान लो
तिरछी नजर उठे खंजर को तान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
ले चल पड़ो मसाले करने नए उजाले
हाथों की छोड़ मेहंदी ले लो करो में भाले
कर भेड़ियों का मर्दन जिद अपनी ठान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
निंद्रा में जग हमेशा नारी छली गई
कांटों से हुई जुदा वो मसली कली गई
बहरूपिये मुखोटे न वांगवा मान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
युग युग की ये कहानी सदियों से भी पुरानी
पग पग पे मुश्किल थी सीता हो देवज्ञानी
मिथकों से आगे निकलो विज्ञान ज्ञान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
दहलीज की रुकावट घुंघट की बंदिशें
सब हाशिए पर ठेलो जितनी हो रंजिशें
कर गर्व ही खुद ही पर अभिमान मान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
करती सृजन रही हो मातृत्व धारकर
बन जाओ अब तो काली दुष्टों को मारकर
तुम कम नहीं किसी से संबिधान जान लो
भारत की बेटियों मेरी बात मान लो
रूपेश धनगर मथुरा
9410490520
बुधवार, 3 जून 2020
रविवार, 19 अप्रैल 2020
मुक्तक
मुक्तक 15 अप्रैल 2020 भारत बंद के दौरान
झील सी गहरी आँखे लुभाती रहे
जुल्फ रेशम सी गजरे सजाती रहे
होंठ मूंगे सी लाली रहे उम्रभर
फूल कलियों सी तू मुस्कराती रहे ।।
हाल ये दिल के तराने सुनाया करो
बात यूँ बेबजह न घुमाया करो
तेरे चेहरे पे खामोशी जँचती नही
मौन लफ़्ज़ों से न बुदबुदाया करो
तीर नयनों से यूँही चलाया करो
नाम लेकर न मुझको बुलाया करो
जर्रा जर्रा खफा है मेरे शहर का
न भरी भीड़ में आजमाया करो
रूपेश धनगर
मथुरा
9410490520
कोविड -19 महामारी भारत बंद के दौरान
कोरोना
साफ सफाई अमल में लाये
कोरोना को मार भगाए
खुद भी जागे गैर जगाये
भारत वासी आगे आये
खुद समझे और समझाए
घर से बाहर कंही न जाये
घर मे रोटी दाल पकाये
बड़े चाव से उनको खाये
अफवाह बिल्कुल ना फैलाये
बहकाबे में कभी न आये
अपना सभी विवेक लगाए
झाड़ फूक के पास न जाये
उसने बैठे गाल बजाये
तुमने मिलकर थाल बजाये
चीरो पाखंडी सीमाये
ऐशा हरगिज न हो पाऐ
शिक्षा से गहरे जुड़ जाए
दूर रहेंगी सभी बलायें
साफ सफाई अमल में लाये
स्वास्थ्य नरम हो रखे दवाएं
कोरोना को मार भगाये
रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520
शनिवार, 21 मार्च 2020
कोरोना 2019
कोरोना
साफ सफाई अमल में लाये
कोरोना को मार भगाए
खुद भी जागे गैर जगाये
भारत वासी आगे आये
खुद समझे और समझाए
घर से बाहर कंही न जाये
घर मे रोटी दाल पकाये
बड़े चाव से उनको खाये
अफवाह बिल्कुल ना फैलाये
बहकाबे में कभी न आये
अपना सभी विवेक लगाए
झाड़ फूक के पास न जाये
उसने बैठे गाल बजाये
तुमने मिलकर थाल बजाये
चीरो पाखंडी सीमाये
ऐशा हरगिज न हो पाऐ
शिक्षा से गहरे जुड़ जाए
दूर रहेंगी सभी बलायें
साफ सफाई अमल में लाये
स्वास्थ्य नरम हो रखे दवाएं
कोरोना को मार भगाये
रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520
शुक्रवार, 20 मार्च 2020
ब्रजभाषा के अनूठे कवि रूपेश धनगर जी का अकाशवाणी मथुरा वृन्दावन से प्रसार...
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