बुधवार, 3 जून 2020
रविवार, 19 अप्रैल 2020
मुक्तक
मुक्तक 15 अप्रैल 2020 भारत बंद के दौरान
झील सी गहरी आँखे लुभाती रहे
जुल्फ रेशम सी गजरे सजाती रहे
होंठ मूंगे सी लाली रहे उम्रभर
फूल कलियों सी तू मुस्कराती रहे ।।
हाल ये दिल के तराने सुनाया करो
बात यूँ बेबजह न घुमाया करो
तेरे चेहरे पे खामोशी जँचती नही
मौन लफ़्ज़ों से न बुदबुदाया करो
तीर नयनों से यूँही चलाया करो
नाम लेकर न मुझको बुलाया करो
जर्रा जर्रा खफा है मेरे शहर का
न भरी भीड़ में आजमाया करो
रूपेश धनगर
मथुरा
9410490520
कोविड -19 महामारी भारत बंद के दौरान
कोरोना
साफ सफाई अमल में लाये
कोरोना को मार भगाए
खुद भी जागे गैर जगाये
भारत वासी आगे आये
खुद समझे और समझाए
घर से बाहर कंही न जाये
घर मे रोटी दाल पकाये
बड़े चाव से उनको खाये
अफवाह बिल्कुल ना फैलाये
बहकाबे में कभी न आये
अपना सभी विवेक लगाए
झाड़ फूक के पास न जाये
उसने बैठे गाल बजाये
तुमने मिलकर थाल बजाये
चीरो पाखंडी सीमाये
ऐशा हरगिज न हो पाऐ
शिक्षा से गहरे जुड़ जाए
दूर रहेंगी सभी बलायें
साफ सफाई अमल में लाये
स्वास्थ्य नरम हो रखे दवाएं
कोरोना को मार भगाये
रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520
शनिवार, 21 मार्च 2020
कोरोना 2019
कोरोना
साफ सफाई अमल में लाये
कोरोना को मार भगाए
खुद भी जागे गैर जगाये
भारत वासी आगे आये
खुद समझे और समझाए
घर से बाहर कंही न जाये
घर मे रोटी दाल पकाये
बड़े चाव से उनको खाये
अफवाह बिल्कुल ना फैलाये
बहकाबे में कभी न आये
अपना सभी विवेक लगाए
झाड़ फूक के पास न जाये
उसने बैठे गाल बजाये
तुमने मिलकर थाल बजाये
चीरो पाखंडी सीमाये
ऐशा हरगिज न हो पाऐ
शिक्षा से गहरे जुड़ जाए
दूर रहेंगी सभी बलायें
साफ सफाई अमल में लाये
स्वास्थ्य नरम हो रखे दवाएं
कोरोना को मार भगाये
रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520
शुक्रवार, 20 मार्च 2020
ब्रजभाषा के अनूठे कवि रूपेश धनगर जी का अकाशवाणी मथुरा वृन्दावन से प्रसार...
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मंगलवार, 31 दिसंबर 2019
नूतन बर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं
हर तन में खुशिया जगे,हर पल हर दिन हर्ष I
सव दुबिधा का अंत कर ,आये नूतन बर्ष II 1
शीत लहर नित बह रही,दिनकर हुए निढाल I
नभ,जल,थल,का शीत से,हुआ हाल बेहाल II 2
नये साल में आपको,मिले नयी सौगात I
नये नये अबसर मिले, नयी नयी हो बात II 3
नयी नवेली रात हो,नया नया दिनमान ।
दिल मे उपवन से खिले,फूलो सी मुस्कान ।।
नया कहेंगे हम जिसे, वही पुराना होय ।
दिन गुजरे रजनी ढ़ले, नित जागे नित सोय।। 5
नभ में कोहरा छा गया ,शीत हुआ बलवान I
ठिठुर ठिठुर कर कट रहा,निर्धन का दिनमान II 6
मोटी ऊनी चादरें, बचा रही है गाथ I
महबूबा सा लग रहा,अब विस्तर का साथ II 7
तापमान है शून्य पर,ठिठुर रहे है लोग I
सर्दी खांसी ज्वर अधिक, लगे शरद से रोग II 8
अब सत्ता से कीजिये,महंगाई पर बात ।
नए साल में नयी नयी ,देदे कुछ सौगात ।। 9
मुद्दों की तू बात कर ,दुखती नब्ज टटोल ।
इधर उधर में क्या रखा,अन्तस् के पट खोल ।। 10
मनकी बातें खोखली,करो काम की बात ।
निर्धन को कांदा नही,धन बल को खैरात ।। 11
कंपे फूस की झोपड़ी,तूफानी बरसात ।
ठिठुरन में बेबस कटी, शरद पूस की रात ।। 12
नये साल में छा गयी,अधरों पर मुस्कान ।
गौरी डूबा जश्न में , कर कर मदिरा पान ।। 13
यार सजाई महफिले,देख रह गया दंग ।
सुध बुध भूले बदन की,उड़ा रातभर रंग ।। 14
बारह बजते ही चला, संदेशों का दौर ।
प्रियजन को देने लगे,हर पल का सिरमौर ।। 15
बुधवार, 4 दिसंबर 2019
अर्थव्यवस्था पर दोहा
मौजूदा हालत पर दोहा निवेदित \n०३/१२/२०१९ मंगलवार
जीडीपी है न्यूनतम बृहद भुखमरी आज
आलू सड़को पर पड़ा सर से महंगी प्याज
रुपेश धनगर मथुरा
9410490520
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