शनिवार, 16 दिसंबर 2023

धनगर (इतिहास)


               धनगर (इतिहास)

अर र र र धनगर अलबेली, कॉम भाग ते पाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है,इतिहास कोन दोहराबेगो

संगम, मौर्य, पल्ल्वो ने ,भारत में झंडे गाड़ दिए 
तलवारो के दम पे हमने, अच्छे अच्छे फाड़ दिए 
अर र र र अब “चंद्रगुप्त” सो वीर कहां ते लावेगो 
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

कटक अटक तक बोली तूती, ऐशे वीर “मल्हार” हुए
पूरे भारत चौथ ऊंघाई,  ऐसे सूबेदार हुए 
अर र र र जाके नाम सुने तेई“ईश्वरसिंह”मर जाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

मुगलों की छाती पे चढ़कर,धर्मो के सत्कार किए
मातु “अहिल्याबाई” ने मठ मंदिर के उद्धार किए 
अर र र र अब “सोमनाथ” और “काशी” कोन बनाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

“तानसेन” और “कालीदास” की महिमा कोन बखान करें
राग शहाना पे नाचे और मेघदूत का गान करें
अर र र र अब “कनकदास” संत कहां से आवेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

श्याम रंग और बदन गठीला,सानी ना कद काठी का 
हार गई धनगर से दुनिया ,तोड़ मिला ना लाठी का 
अर र र र अब “रूपेश धनगर छैला”कलम चलाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो


कवि/सर्वाधिकार सुरक्षति 
रूपेश धनगर,मथुरा
Mo-9410490520

रविवार, 4 जून 2023

महान

धनगर वीर महान 



धनगर शीश कटाते आए,देते आए जान 
देश के धनगर वीर महान 


1 श्याम वर्ण और बदन गठीला 
    लट घुंघराली दिखे संजीला 
     काली कमली साफा पीला 
     मुरली की  सुन तान 
   देश के धनगर वीर महान 

2  इतिहासो में दर्ज कहानी 
    किला छोड़ भागे अफगानी
    बलिदानी की अमिट कहानी
    पानीपत मैदान 
    देश के धनगर वीर महान

3  धनगर में थी जब मजबूती 
   कटक अटक तक बोली तूती
   योद्धा धनगर कॉम सपूती
   मरहट्टी पहिचान
   देश के धनगर वीर महान

4 विजय नगर ,मैसूरी राजे 
    चंद्रगुप्त ,चंदेले राजे 
    कुरू,होलकर,वीर मराठे
    जानें सकल जहान
    देश के धनगर वीर महान

5 सूरज कू दिल्ली जितबाई
    तुर्क,मुगल ने मुंह की खाई
    अंग्रेजो की करी ठुकाई 
    काट लिए थे कान 

    देश के धनगर वीर महान


6 धर्म परायण ता सिखलाई 
   लाखों मंदिर घाट बनाई 
  देवी मात अहिल्याबाई 
  धनगर की संतान 
  देश के धनगर वीर महान

देश के धनगर वीर महान 

लेखक 
रुपेश धनगर ,मथुरा
मो, 9410490520

मंगलवार, 2 मई 2023

निराश्रित गाय

           निराश्रित गाय
                   गीत
 
मेरा जर्जर बदन, इस भरे शहर में, अब किसी को भी देता दिखाई नही 
में व्यथित हो चली, मरती पग पग रही, आँशुओ में ढली पर रंभाई नही 

बाग उजड़े मिटा है बसेरा मेरा
अब तो कूडो के, ढेरों में डेरा मेरा
यातनाएं सहू , गॉव गलियों रहू
लोग कम है जिन्होंने सताई नही 

ठौर मुझको कहाँ, बस्तियां है घिरी
और मेरे नाम से, योजनाएं निरी
लाठी,डंडों से चोटिल, है मेरा बदन
अस्पतालों में मिलती दवाई नही 

जाम दारू के, जब से उड़ाने लगे
पीज़ा बर्गर अमूलो, से खाने लगे
दूध,मक्खन, मठ्ठा की रही चाह ना
ग्वाल बालो को, भाती मलाई नही 

पुस्त मेरी मिटी है, तुम्हे सींचते
पूत मेरे मरे, हल तेरे खींचते
अब तो नंदी भी, कट्टी में कटने लगे 
अब हलो से भी होती बुबाई नही

मठ में चांदी की धेनु, दिखाते खड़े
मुझको भी भूखा रखके, चढ़ावे बड़े
गाय गोवर से फंडिग, विदेश यहां 
दूध माखन में उतनी, कमाई नही 

उजड़े मधुवन को, धनगर सवारे यंहा
नख पे गिरबर उठाये, वो ग्वाले कहाँ 
हर तरफ बस्तियों में, गड़रिये बसे
 आज इनमें भी कोई, कन्हाई नही 

मेरा जजर्र बदन ,,,,

रूपेश धनगर
मथुरा
9410490520

सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

रसिया धनगर गीत

रसिया धनगर गीत

बहन धनगर ने जुल्म गुजारियो 
सपने में बादर फारियो

1-धनगर रात स्वप्न में आयो 
    मेरो रोम रोम  हर्षायो 
  प्रकट भयो घर मेरे बंशी बारो
 सपने में बादर ----------

2-श्याम रंग और बदन गठीला 
   जवानी में लग रहयों संजीला 
 बहन जीतो काली कमली बारों
सपने में -----------------

3- हंस हंस के मोते बतरायो 
    बातन में मनुआ भरमायो
अरी री जानें केसों जादू डारो 
सपने में ------------

4-जबरन दीन्ही मोड़ कलाई 
   लाजन मारी बहुत शरमाई 
अरी रीजीतो मान्योना बजमारो
सपने में --------
5-अंग अंग में जादू डारो
  जैसे नाग डस गयो कारो
 अरी री वो तो झूम रहो मतवारो
सपने में ----------

6-आंख खुली हिल्की भर रोई
    तन मन की सब ,सुधि बुद्धि खोई
"धनगर" लुक्यो  "पचावर" बारो
सपने में बादर फारियो


रुपेश धनगर ,मथुरा
9410490520

शनिवार, 22 जनवरी 2022

चुनावी गीत 2022

चुनावी गीत 

ब्रज भाषा लोकगीत  की प्रस्तुति 
रुपेश धनगर मथुरा

धनगर भैया विनती कर रहे, यू पी की सरदारी ते ।
सोच ,समझके वोट करो तो,बचे रहो दुश्वारी ते ।।
 
घर घर में यूं पी की जनता,महंगी बिजली कू रोवे
मीठो पानी मिल नाय पायो, मैया मूढ़न पे ढोबे
बंदर काट रहे चौड़े में,   दहशत में है नर नारी
छुट्टा सांड चरें खेतन में, उजड़ रही खेती वाडी
खेत बचाने कौ मौकों है, कन्हू आज हलधारी ते
सोच समझके वोटिंग करियो,,,,,,,,,,

गौशालाएं चले नाम की, गैया खेतन में डोले 
लाश ने ते गंगा पट जाबे,झूठ पुलिंदा के खोले 
अत्याचार बढे बिटिया ने पे,थाने में जल रही नारी
राया,सुरीर,उन्नाव,हाथरस, जुर्म सहे इन ने भारी
आंखन से जलधार, रोय रही हूकभरी सिसकारी ते
सोच समझकर वोटिंग करियो,,,,,,,,,,,,,,

लखनऊ से आदेश करें पर,देखो इनकी चतुराई 
धनगर भटक रहें सड़कन पे, बहरी सरकार न सुनपाई
चुन चुन के mla,mp, मंत्री बन कुर्सी हथियाई
विरोध प्रदर्शन धरना रैली,कोई काम नही आई
कंश राज में dm,cm, छोटे है पटवारी ते 
सोच समझके बोटिंग करियों ,दूर रहो दुश्वारी ते ।



मौलिक एव सर्वाधिकार सुरक्षित
कवि/लेखक
रुपेश धनगर मथुरा
9410490520

मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

महंगाई

महँगाई

अब तो मित्रो प्राणों पर बन आई है ।
सर से ऊँची बेदर्दी महँगाई है ।



दाम तेल के सौ रुपया से ऊपर है ।
महामारी में धेला नही कमाई है ।

विधालय भी बंद पड़े हैं सालों से
पर मधुशालाओ पे रंगत छाई है  ।

गयीं नौकरी हाथ धरे बैठे घर में
नेताजी की रैली में अंगड़ाई है ।


अस्पताल में प्राण बायु की किल्लत है
अब तो यारो मुश्किल हुई दवाई है ।

झूठे वादे ,बात फरेबी है मनकी
ऐशे लगती जैसे बालूशाही है ।


कल परसों जो डायन डायन कहते थे ।
अब रिश्ते में उनकी ही भौजाई है ।

रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520

झूठा चाय बाला

गीत

बड़ा झूठ बोले तू ओ चाय बाले
लगा छिनने क्यों,मुँह के निबाले

तेरी झूठी बातों में खुद को फँसाया
ये जा तुझपे बारी,ये दिल भी लुटाया
किया है बतन सारा तेरे हवाले
लगा छिनने क्यूँ मुँह के निबाले 

2-हर वक्त लंबी लंबी लाइने       लगाई
मिला ना सिलेंडर तेरा,मिली न दवाई
बात मानले थोड़ा रहम हमपे खाले
लगा छीनने क्यू -------------- 

3 -बंद है मदरसा कब से हुई ना पढ़ाई
पूरी पूरी फीस,और ये बढ़ती महँगाई
निकले पडे यहाँ पे सबके दिवाले
लगा छीनने क्यू मुँह के निवाले

4-छपता है झूठ सारा,खूब अखवार में 
बोलता खिलाफ जो भी,खीँचे दरवार में 
खुलते राज सारे,चाहे जितना छुपाले

लगा छिनने क्यू मुँह के निवाले 





रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520