बुधवार, 13 नवंबर 2019

गीत वृन्दावन

                               गीत 

कण कण खुशबु फूलो सी ब्रज की माटी ही चन्दन है 
जहा राधेश्याम बसें दिल में श्री धाम मेरा बृन्दावन है 



आजाओ ब्रज में भ्रमण करे संकल्पो का स्मरण करे
कोई मुश्किल ेशा काम नहीं करते जिसको घनश्याम नहीं वृन्दावन नगरी प्यारी है जाऊ जापे बलिहारी है 
दीनो के दीनानाथ यहाँ बस् ते है बांके विहारी है 
हर आने जाने बाले को पैदल या रिक्क्षे बाले को 
श्री राधे का उद्बोधन है श्री कृष्णा कहने बालो को 
हर अतिथि का सत्कार यहाँ व्रजबासी देते प्यार यहाँ 
रिश्तो की समझ नहीं जिनको उनको मिल जाए सार यहाँ 
ले प्यार पगी मीठी बोली हर रही का अभिनन्दन है 
जहा राधे श्याम बसें दिल ................


Brindavan बांकेबिहारी है गोवेर्धन में गिरिधारी है
 है नंदगाव नटखट वासी बरसाने राधा प्यारी है 
गोकुल में जा गोपाल बेस गोपाल सखा ब्रजबासी है 
महावन में है मोहन प्यारे दाऊजी में हलधारी है 
है लता पत्तये देव तुल्य खग मृग मधुकर बनमाली है ब्रज नारी रखती सखी भाव ये बसुंधरा मतवाली है 
है रंगभरे त्यौहार यहाँ मीथीउ लगती गाली है 
तीनो लोको के जगन्नाथ मथुरा में यशोदा नंदन है 
जहा राधे श्याम बसें दिल में .....


हाथो में पूजा की थाली संग  राधे राधे ताली 
यहाँ श्याम रंग की देख छटा दुनिया हो जाए मतवाली 
रसिको की महफ़िल है प्यारी कहु महक रही सरसो क्यारी 
कहु स्वर है ढोल नगाड़ो के राधे राधे जयकारो के 
यहाँ नित नए रोज भक्ति के दृश्य करते रहते है मोर नृत्य
चहुंदिश सदियों से गुंज रहा श्री कृष्ण नाम का स्यंदन है 

जहा राधे श्याम बसें दिल में .....



रुपेश धनगर मथुरा  
9410490520

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