रुपेश धनगर मथुरा
गुरुवार, 14 नवंबर 2019
माँ मनहरण घनाक्षरी
माँ का विशिष्ट रूप छाव हो कड़ी धूप जग में ममत्व प्यारे लाल पे लुटाती है
हरपाल देखभाल चाहे फिर जो भी हाल गीले में सके खुद सूखे में सुलाती है
ऐशी जग जननी का करू क्या बखान खुद मेरी लेखनी ही लिखना भूल जाती है
माँ के सामान दुनिया में अल्फाज नहीं मुझे हर श्रेष्ठता में माँ ही दिख जाती है
रुपेश धनगर मथुरा
मो-९४१०४९०५२०
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें