पैंजनिया पैर पिली पटुका गले में डॉर काली सी कामरिया धार हिय हरषायो है
शक्ति रूप शक्तिशाली भक्तन को वनमाली प्रेम को पुजारी कृष्ण सावरो कहायो है
धन्य धान्य युक्त ब्रज हो दवाव मुक्त कोप से वचाने हेतु
गिरवर उठायो है
नख पे उठायो गिरी प्रलय से बचायो ब्रज क्ष न में ही मारे मान इंन्द्र घबरायो है
गली और गिरारे गाम ाथो याम राधेश्याम प्रेम के पुजारियों ने सुबह शाम गायो है
राधा की दुलारी प्यारी सखियों के मन मान मोर बनयायो श्याम रास हु रचायो है
योग ऋषि प्रेम ऋषि कर्म ऋषि सावरे ने बासुरी ु बजायी और चक्र भी उठायो है
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