सदियों से पोषित हुए जातिबाद मनभेद
सदियों से होता रहा बेइज्जत अपमान
निर्धन के हिस्से नहीं रत्तीभर सम्मान
मेहनत में ही चूर है , बहा पसीना खून
को समझा इस देश में,हलधर का मजमून
जहरीली आवोहवा ,जीना है दुस्वार
दिल्ली अपने कर्म की झेल रही है मार
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