रविवार, 17 नवंबर 2019

दोहे धनगर के

 ताक़तवर गोली नहीं, बड़े प्रेम के बोल 
  धीरे धीरे प्रेम से ,अन्तस् के पट खोल


माँ के कदमो में निरे जन्नत के खलिहान 
माँ की सूरत ही लगे  अल्हा ओ भग़वान 


आज तलक देखा नहीं,ईस्वर का आकार 
माँ के चरणों में मिला सव जीवन का सार 

में सत का गामी सदा,तनिक न भाता झूठ 
 झूठे को झूठा कहु  कोई जाओ रूठ 


झंझावात संसार के,रोज नया संघर्ष 
झुण्ड अभावो के गुथे, कैसे हो उत्कर्ष 

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