कैसे तुझे खिलाऊ
कैसे तुझे मनाऊ
तू रोयेगा दिल टूटेगा
अश्को का सागर फूटेगा
कैसे में बहलाऊ
अहलादित हु तुझको पाकर
तुझपर तन मन धन न्योछावर
घी के दिए जलाऊ
मुझको प्राणो से प्यारा है
तू सूरज चंदा तारा है
बार बार बलि जाऊ
तेरी आज बलाये लेलु
घुटनो के बल संग में खेलु
में बचपन दोहराऊं
पूत मेरे में तेरी माँ हु
आस मेरी तू ,में तेरी जा हु
कैसे में समझाऊ
ढेरो खेल खिलोने देकर
बाल,कपोल सलोने छूकर
ह्रदय से चिपटाऊ
ऊँगली पकड़ के तुझे घुमा दू
अपना जीवन तुझे थमा दू
कंधो पर बैठाऊ
खुशियों से दामन को भर दू
आज धरा पर एम्बर धर दू
हीरे मोती लुटबाऊ
निंदिया रानी को बुलबाकर
अमृत जैसा दूध पिलाकर
लोरी तुझे सुनाऊ
रुपेश धनगर मथुरा
9410490520,9760986966
सभी लोग मेरी कविता अच्छी लगे कमेंट करे
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