शनिवार, 16 दिसंबर 2023

धनगर (इतिहास)


               धनगर (इतिहास)

अर र र र धनगर अलबेली, कॉम भाग ते पाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है,इतिहास कोन दोहराबेगो

संगम, मौर्य, पल्ल्वो ने ,भारत में झंडे गाड़ दिए 
तलवारो के दम पे हमने, अच्छे अच्छे फाड़ दिए 
अर र र र अब “चंद्रगुप्त” सो वीर कहां ते लावेगो 
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

कटक अटक तक बोली तूती, ऐशे वीर “मल्हार” हुए
पूरे भारत चौथ ऊंघाई,  ऐसे सूबेदार हुए 
अर र र र जाके नाम सुने तेई“ईश्वरसिंह”मर जाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

मुगलों की छाती पे चढ़कर,धर्मो के सत्कार किए
मातु “अहिल्याबाई” ने मठ मंदिर के उद्धार किए 
अर र र र अब “सोमनाथ” और “काशी” कोन बनाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

“तानसेन” और “कालीदास” की महिमा कोन बखान करें
राग शहाना पे नाचे और मेघदूत का गान करें
अर र र र अब “कनकदास” संत कहां से आवेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो

श्याम रंग और बदन गठीला,सानी ना कद काठी का 
हार गई धनगर से दुनिया ,तोड़ मिला ना लाठी का 
अर र र र अब “रूपेश धनगर छैला”कलम चलाबेगो
अर र र र तेरो स्वर्णिम है इतिहास कोन दोहराबेगो


कवि/सर्वाधिकार सुरक्षति 
रूपेश धनगर,मथुरा
Mo-9410490520

रविवार, 4 जून 2023

महान

धनगर वीर महान 



धनगर शीश कटाते आए,देते आए जान 
देश के धनगर वीर महान 


1 श्याम वर्ण और बदन गठीला 
    लट घुंघराली दिखे संजीला 
     काली कमली साफा पीला 
     मुरली की  सुन तान 
   देश के धनगर वीर महान 

2  इतिहासो में दर्ज कहानी 
    किला छोड़ भागे अफगानी
    बलिदानी की अमिट कहानी
    पानीपत मैदान 
    देश के धनगर वीर महान

3  धनगर में थी जब मजबूती 
   कटक अटक तक बोली तूती
   योद्धा धनगर कॉम सपूती
   मरहट्टी पहिचान
   देश के धनगर वीर महान

4 विजय नगर ,मैसूरी राजे 
    चंद्रगुप्त ,चंदेले राजे 
    कुरू,होलकर,वीर मराठे
    जानें सकल जहान
    देश के धनगर वीर महान

5 सूरज कू दिल्ली जितबाई
    तुर्क,मुगल ने मुंह की खाई
    अंग्रेजो की करी ठुकाई 
    काट लिए थे कान 

    देश के धनगर वीर महान


6 धर्म परायण ता सिखलाई 
   लाखों मंदिर घाट बनाई 
  देवी मात अहिल्याबाई 
  धनगर की संतान 
  देश के धनगर वीर महान

देश के धनगर वीर महान 

लेखक 
रुपेश धनगर ,मथुरा
मो, 9410490520

मंगलवार, 2 मई 2023

निराश्रित गाय

           निराश्रित गाय
                   गीत
 
मेरा जर्जर बदन, इस भरे शहर में, अब किसी को भी देता दिखाई नही 
में व्यथित हो चली, मरती पग पग रही, आँशुओ में ढली पर रंभाई नही 

बाग उजड़े मिटा है बसेरा मेरा
अब तो कूडो के, ढेरों में डेरा मेरा
यातनाएं सहू , गॉव गलियों रहू
लोग कम है जिन्होंने सताई नही 

ठौर मुझको कहाँ, बस्तियां है घिरी
और मेरे नाम से, योजनाएं निरी
लाठी,डंडों से चोटिल, है मेरा बदन
अस्पतालों में मिलती दवाई नही 

जाम दारू के, जब से उड़ाने लगे
पीज़ा बर्गर अमूलो, से खाने लगे
दूध,मक्खन, मठ्ठा की रही चाह ना
ग्वाल बालो को, भाती मलाई नही 

पुस्त मेरी मिटी है, तुम्हे सींचते
पूत मेरे मरे, हल तेरे खींचते
अब तो नंदी भी, कट्टी में कटने लगे 
अब हलो से भी होती बुबाई नही

मठ में चांदी की धेनु, दिखाते खड़े
मुझको भी भूखा रखके, चढ़ावे बड़े
गाय गोवर से फंडिग, विदेश यहां 
दूध माखन में उतनी, कमाई नही 

उजड़े मधुवन को, धनगर सवारे यंहा
नख पे गिरबर उठाये, वो ग्वाले कहाँ 
हर तरफ बस्तियों में, गड़रिये बसे
 आज इनमें भी कोई, कन्हाई नही 

मेरा जजर्र बदन ,,,,

रूपेश धनगर
मथुरा
9410490520

सोमवार, 10 अक्टूबर 2022

रसिया धनगर गीत

रसिया धनगर गीत

बहन धनगर ने जुल्म गुजारियो 
सपने में बादर फारियो

1-धनगर रात स्वप्न में आयो 
    मेरो रोम रोम  हर्षायो 
  प्रकट भयो घर मेरे बंशी बारो
 सपने में बादर ----------

2-श्याम रंग और बदन गठीला 
   जवानी में लग रहयों संजीला 
 बहन जीतो काली कमली बारों
सपने में -----------------

3- हंस हंस के मोते बतरायो 
    बातन में मनुआ भरमायो
अरी री जानें केसों जादू डारो 
सपने में ------------

4-जबरन दीन्ही मोड़ कलाई 
   लाजन मारी बहुत शरमाई 
अरी रीजीतो मान्योना बजमारो
सपने में --------
5-अंग अंग में जादू डारो
  जैसे नाग डस गयो कारो
 अरी री वो तो झूम रहो मतवारो
सपने में ----------

6-आंख खुली हिल्की भर रोई
    तन मन की सब ,सुधि बुद्धि खोई
"धनगर" लुक्यो  "पचावर" बारो
सपने में बादर फारियो


रुपेश धनगर ,मथुरा
9410490520

शनिवार, 22 जनवरी 2022

चुनावी गीत 2022

चुनावी गीत 

ब्रज भाषा लोकगीत  की प्रस्तुति 
रुपेश धनगर मथुरा

धनगर भैया विनती कर रहे, यू पी की सरदारी ते ।
सोच ,समझके वोट करो तो,बचे रहो दुश्वारी ते ।।
 
घर घर में यूं पी की जनता,महंगी बिजली कू रोवे
मीठो पानी मिल नाय पायो, मैया मूढ़न पे ढोबे
बंदर काट रहे चौड़े में,   दहशत में है नर नारी
छुट्टा सांड चरें खेतन में, उजड़ रही खेती वाडी
खेत बचाने कौ मौकों है, कन्हू आज हलधारी ते
सोच समझके वोटिंग करियो,,,,,,,,,,

गौशालाएं चले नाम की, गैया खेतन में डोले 
लाश ने ते गंगा पट जाबे,झूठ पुलिंदा के खोले 
अत्याचार बढे बिटिया ने पे,थाने में जल रही नारी
राया,सुरीर,उन्नाव,हाथरस, जुर्म सहे इन ने भारी
आंखन से जलधार, रोय रही हूकभरी सिसकारी ते
सोच समझकर वोटिंग करियो,,,,,,,,,,,,,,

लखनऊ से आदेश करें पर,देखो इनकी चतुराई 
धनगर भटक रहें सड़कन पे, बहरी सरकार न सुनपाई
चुन चुन के mla,mp, मंत्री बन कुर्सी हथियाई
विरोध प्रदर्शन धरना रैली,कोई काम नही आई
कंश राज में dm,cm, छोटे है पटवारी ते 
सोच समझके बोटिंग करियों ,दूर रहो दुश्वारी ते ।



मौलिक एव सर्वाधिकार सुरक्षित
कवि/लेखक
रुपेश धनगर मथुरा
9410490520

मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

महंगाई

महँगाई

अब तो मित्रो प्राणों पर बन आई है ।
सर से ऊँची बेदर्दी महँगाई है ।



दाम तेल के सौ रुपया से ऊपर है ।
महामारी में धेला नही कमाई है ।

विधालय भी बंद पड़े हैं सालों से
पर मधुशालाओ पे रंगत छाई है  ।

गयीं नौकरी हाथ धरे बैठे घर में
नेताजी की रैली में अंगड़ाई है ।


अस्पताल में प्राण बायु की किल्लत है
अब तो यारो मुश्किल हुई दवाई है ।

झूठे वादे ,बात फरेबी है मनकी
ऐशे लगती जैसे बालूशाही है ।


कल परसों जो डायन डायन कहते थे ।
अब रिश्ते में उनकी ही भौजाई है ।

रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520

झूठा चाय बाला

गीत

बड़ा झूठ बोले तू ओ चाय बाले
लगा छिनने क्यों,मुँह के निबाले

तेरी झूठी बातों में खुद को फँसाया
ये जा तुझपे बारी,ये दिल भी लुटाया
किया है बतन सारा तेरे हवाले
लगा छिनने क्यूँ मुँह के निबाले 

2-हर वक्त लंबी लंबी लाइने       लगाई
मिला ना सिलेंडर तेरा,मिली न दवाई
बात मानले थोड़ा रहम हमपे खाले
लगा छीनने क्यू -------------- 

3 -बंद है मदरसा कब से हुई ना पढ़ाई
पूरी पूरी फीस,और ये बढ़ती महँगाई
निकले पडे यहाँ पे सबके दिवाले
लगा छीनने क्यू मुँह के निवाले

4-छपता है झूठ सारा,खूब अखवार में 
बोलता खिलाफ जो भी,खीँचे दरवार में 
खुलते राज सारे,चाहे जितना छुपाले

लगा छिनने क्यू मुँह के निवाले 





रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520

शनिवार, 13 नवंबर 2021

निजीकरण

निजीकरण 
              ब्रज लोक गीत
           (25/01/2021)

निजीकरण की मंडी,बिक रहयो ,भारत देश हमारौ 
इन भक्तन नै बादर फ़ारो

बढ़ती जाय रही पीर,जिगर कौन करें निपटारौ

इन भक्तन ने बादर फारौ 

विद्यालय गए निजीकरण में,मोटी फीस बढामें 
निर्धन कू न मिले पढ़ाई,दर दर ठोकर खामे 
जान बूझकर पड़े नरक में,अपनो जन्म बिगारौ
इन भक्तन ने बादर फारौ


पढ़बे लिखबे नाय मिले, बंधुआ मजदूर बनोगे
शोषण,अत्याचार यातना ,नित नई रोज सहोगे
करो गुलामी पस्त रहोगे, मिले नही छुटकारौ

इन भक्तन ने बादर फारौ

पूत अमीरों के सुख साधन,बाँट देश के लेंगे
तेरी नींद हराम,चाम भी तन से खिंचवा लेंगे 
जिधर मिलोगे ,दुमे हिलाते कर दें नाश तुम्हारौ

इन भक्तन ने ......................

अंधभक्त बजाय रहे ताली,तन मन की सुध भूले
घर में दरिया ,दार मिले ना,बुझे पड़े है चूले
गयी भुखमरी फैल देश मे,अब भट्टा बैठारो

इन भक्तन ने  बादर फारौ


निजीकरण को दमन करौ, मिलकर आवाज उठाओ
गूंगी बहरी सरकारों के पर्दे 
आज हिलाओ
नाय जगे तौ भरी दुपहरी ,चमके  चंदा तारौ

इन भक्तन ने बादर फारौ

बढ़ती जाय रही पीर जिगर की 
कौन करे निपटारौ

निजीकरण की मंडी बिक रह्यो ,भारत देश हमारौ 
इन भक्तन ने बादर फारौ

रूपेश धनगर ,मथुरा
मो-9410490520

किसान धरने पर

ब्रज लोक गीत
          (04/01/2021)

दोय महीना से दिल्ली बॉर्डर पे बैठे हलधारी ।
नाय बापस ले कानून,राज बेदर्दी न को भारी ।

भारत सबरो बंद,दुबक रहे घर मे नर नारी ।
लाये काले कानून देश मे निष्ठुर सरकारी ।
ना चर्चा,कोई बहस करी सड़यन्त्री तैयारी ।

नाय वापस.....................

सुनके खबर अन्नदाता को,हियो बोल गयो ।
छीने निवाले पुस्तन के,दिल्ली तक ढोल गयो ।
सब भये इकट्ठे पंच, जुट गई सारी सरदारी ।

नाय बापस .......................

मौन प्रदर्शन धरना रैली,हलधर ने कर ली ।
पानी की बौछारें सीधी ,सीने में भर ली ।
सर्दी न कि ठिठुरी रात ,झुकी नाय इनकी खुद्दारी ।
नाय बापस ले .....................

 हक्क हकूक कू लामबंद,छोड़ी खेती बाड़ी
कर दई दिल्ली जाम,साथ महिला है गई ठाड़ी 
कंहू छुप गयो चौकीदार ,देख लई सब चौकीदारी 

नाय बापस ........................


कैसो है अन्याय,अडिंग है कैसे अन्यायी
मुँह पर मीठे बोल,रूप शैतानी परछाई
चेनल सब गूंगे भये,देश मे कैसी लाचारी 

नाय बापस ले ..................


रूपेश धनगर ,मथुरा
मो.9410490520

रविवार, 3 जनवरी 2021

किसान धरनारत लोकगीत ब्रजभाषा

किसान धरनारत( 03012020)

मेरे भारत की आत्मा और प्रान रे
काहे धरने पे बैठयो है किसान रे 

हठ काहे सरकार ,की हठीली हैं
छोड़े छाड़े सोच,पाली जहरीली है
नाय मटके किसानन कि कीली है
करें सबकी लंगोंटिया यू गीली है
माँग सच्ची जाकी, सब लेउ मान रे 
काहे धरने पे बैठगो किसान रे 

ये तो दुनिया मे सीधो भोलो भालो रे
छीने काहे काजे याही को निवालों रे
जाको निकरो ही पड़ो है दिवालो रे
करें रात दिन बड़ो ही कसालो रे
है पस्त जाको पूरो खानदान रे

काहे धरने पे बैठयो है किसान रे 
घर झोपड़ी है,जान पड़ी खेत मे
 रहे लिपटेमा आठो याम रेत में 
नाहे कौरा जाये चैन तेऊ पेट मे
नाय मिलती दुहन्नी जाय भेंट में
जाके मुफ्त में ही बिकें गेँहू धान रे
काहे धरने पे बैठयो है किसान रे ।

खेती आलू गोभी,कोई बागवानी है
बीज महंगों मिले, मिले नाय पानी है 
महँगी बिजली से,आफत किसानी है
टिड्डी दल, चौंपा ,ओले तूफानी है
खेती सबइ मुसिबतन की खान रे
चौ धरने पे बैठायो किसान रे ।

टोटे मद्दे मे ही ,पालै संतान कू
खुद भूखों रहे अन्न ,हिंदुस्तान कू
जिंदा रखतो सदा ही स्वाभिमान कू
मेरो कोटिक प्रणाम,है किसान कू
जाको छोरा ठाड़यो,सीमा पे जवान रे ।

काहे धरने पे बैठयो है किसान रे

अंधी बहरी बनबैठी सरकार है 
खुद अपनो से करें तक़रार है
सत्ता दम्भ के ही सब आसार है
भेजू लानत हजार बार बार है 
लेउ बापस हठीली हठ ठान रे ।

काहे धरने पे बैठयो है किसान रे 

मेरे भारत की आत्मा और प्रान रे 
काहे धरने पे बैठयो है किसान रे ।

एक रात कोही रैन बसेरा है
उड़ जानो कल होंत सबेरा है
छट जानो सब घनो अंधेरा है 
काहे पक्षपात करे तेरो मेरा है 
हाय पल में ही झड़ जाय गुमान रे
काहे धरने पे बैठ्यो है किसान रे 

रूपेश धनगर,पचावर
बालाजीपुरम, मथुरा
मो-9410490520

शनिवार, 7 नवंबर 2020

निराश्रित गायें

निराश्रित गाय 
          07112020
आपकी समीक्षा में ।

निर्झर सी अंशुअन की धारा,जर्जर बदन लिये डोले।
दींन हींन बलहीन गाय की ,ब्रज में पीड़ा को बोले ।।

बड़े-बड़े मठ मंदिर ब्रज के,गइयन के रखबारे है ।
लेकिन उदर गाय का खाली,उत बारे के न्यारे है ।।
निष्ठुर चारा खाय रहे है,यहाँ पर मोहड़ो को खोले 
दींन हींन ...............
गायें कचरा फांक रही है,तरसी दाना पानी को ।
निरी योजनाएं दफ्तर में ,लगा रही है सानी को ।
भृष्ट तंत्र के काले चिट्ठे,ढांकी खोले को पोले ।
दींन हीन बलहीन गाय......
खलिहानों पर बनी हवेली,सिकुड़ गयी नदिया झीलें ।
चारागाह उजाड़ बनो को ,ताक रही बैठी चीले ।
झूठ स्वार्थ फल फूल रहा है ,,सच को डंका को बोले ।
दींन हींन बलहीन ,,.....
एक तरफ मैया कह बोले,बेटा क्यो दुत्कार रहे ।
राजनीति में मुद्दा गायें, बना वही सरकार रहे ।
भूखी जर्जर सिसक रही है,वो पीट रहे अपनी ढोले ।

दींन हींन बलहीन गाय की ,ब्रज में पीड़ा को बोले

रूपेश धनगर मथुरा
मो 9410490520

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020

भारत की बेटियों

           भारत की बेटियों

भारत की बेटियो मेरी बात मान लो
 तिरछी नजर उठे खंजर को तान लो 

भारत की बेटियों मेरी बात मान लो

 ले चल पड़ो मसाले करने नए उजाले 
हाथों की छोड़ मेहंदी ले लो करो में भाले 
कर भेड़ियों का मर्दन जिद अपनी ठान लो

भारत की बेटियों मेरी बात मान लो

निंद्रा में जग हमेशा  नारी छली गई 
कांटों से हुई जुदा वो मसली कली गई 
बहरूपिये मुखोटे न वांगवा  मान लो

भारत की बेटियों मेरी बात मान लो 

युग युग की ये कहानी सदियों से भी पुरानी 
पग पग पे मुश्किल थी सीता हो देवज्ञानी 
मिथकों से आगे निकलो विज्ञान ज्ञान लो 

भारत की बेटियों मेरी बात मान लो 

दहलीज की रुकावट घुंघट की बंदिशें
सब हाशिए पर ठेलो जितनी हो रंजिशें 
कर गर्व ही खुद ही पर अभिमान मान लो 

भारत की बेटियों मेरी बात मान लो 

करती सृजन रही हो मातृत्व धारकर 
बन जाओ अब तो काली दुष्टों को मारकर 
तुम कम नहीं किसी से संबिधान जान लो

भारत की बेटियों मेरी बात मान लो 

रूपेश धनगर मथुरा
9410490520

रविवार, 19 अप्रैल 2020

मुक्तक

मुक्तक 15 अप्रैल 2020 भारत बंद के दौरान

झील सी गहरी आँखे लुभाती रहे
जुल्फ रेशम सी गजरे सजाती रहे
होंठ मूंगे सी लाली रहे उम्रभर
फूल कलियों सी तू मुस्कराती रहे ।।

हाल ये दिल के तराने सुनाया करो
बात यूँ बेबजह न घुमाया करो 
तेरे चेहरे पे खामोशी जँचती नही 
मौन लफ़्ज़ों से न बुदबुदाया करो

तीर नयनों से यूँही चलाया करो
नाम लेकर न मुझको बुलाया करो
जर्रा जर्रा खफा है मेरे शहर का
न भरी भीड़ में आजमाया करो

रूपेश धनगर
मथुरा
9410490520

कोविड -19 महामारी भारत बंद के दौरान

कोरोना 

साफ सफाई अमल में लाये 
कोरोना को मार भगाए

खुद भी जागे गैर जगाये
भारत वासी  आगे आये 

खुद समझे और समझाए
घर से बाहर कंही न जाये

घर मे रोटी दाल पकाये
बड़े चाव से उनको खाये

अफवाह बिल्कुल ना फैलाये
बहकाबे में कभी न आये 

अपना सभी विवेक लगाए
झाड़ फूक के पास न जाये

उसने बैठे गाल बजाये
तुमने मिलकर थाल बजाये

चीरो पाखंडी सीमाये 
ऐशा हरगिज न हो पाऐ

शिक्षा से गहरे जुड़ जाए
दूर रहेंगी सभी बलायें

साफ सफाई अमल में लाये
स्वास्थ्य नरम हो रखे दवाएं

कोरोना को मार भगाये

रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520

शनिवार, 21 मार्च 2020

कोरोना 2019

कोरोना 

साफ सफाई अमल में लाये 
कोरोना को मार भगाए

खुद भी जागे गैर जगाये
भारत वासी  आगे आये 

खुद समझे और समझाए
घर से बाहर कंही न जाये

घर मे रोटी दाल पकाये
बड़े चाव से उनको खाये

अफवाह बिल्कुल ना फैलाये
बहकाबे में कभी न आये 

अपना सभी विवेक लगाए
झाड़ फूक के पास न जाये

उसने बैठे गाल बजाये
तुमने मिलकर थाल बजाये

चीरो पाखंडी सीमाये 
ऐशा हरगिज न हो पाऐ

शिक्षा से गहरे जुड़ जाए
दूर रहेंगी सभी बलायें

साफ सफाई अमल में लाये
स्वास्थ्य नरम हो रखे दवाएं

कोरोना को मार भगाये

रूपेश धनगर मथुरा
मो-9410490520

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

नूतन बर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएं

हर तन में खुशिया जगे,हर पल हर दिन हर्ष I
सव दुबिधा का अंत कर ,आये नूतन बर्ष II 1

शीत लहर नित बह रही,दिनकर हुए निढाल I
नभ,जल,थल,का शीत से,हुआ हाल बेहाल II 2

नये साल में आपको,मिले नयी सौगात I
नये नये अबसर मिले, नयी नयी हो बात II 3

नयी नवेली रात हो,नया नया दिनमान ।
दिल मे उपवन से खिले,फूलो सी मुस्कान ।।

नया कहेंगे हम जिसे, वही पुराना होय ।
दिन गुजरे रजनी ढ़ले, नित जागे नित सोय।। 5


नभ में कोहरा छा गया ,शीत हुआ बलवान I
ठिठुर ठिठुर कर कट रहा,निर्धन का दिनमान II 6

मोटी ऊनी चादरें, बचा रही है गाथ I
महबूबा सा लग रहा,अब विस्तर का साथ II 7

तापमान है शून्य पर,ठिठुर रहे है लोग I
सर्दी खांसी ज्वर अधिक, लगे शरद से रोग II 8

अब सत्ता से कीजिये,महंगाई पर बात ।
नए साल में नयी नयी ,देदे कुछ सौगात ।। 9

मुद्दों की तू बात कर ,दुखती नब्ज टटोल ।
इधर उधर में क्या रखा,अन्तस् के पट खोल ।। 10

मनकी बातें खोखली,करो काम की बात ।
निर्धन को कांदा नही,धन बल को खैरात ।। 11

कंपे फूस की झोपड़ी,तूफानी बरसात ।
ठिठुरन में बेबस कटी, शरद पूस की रात ।। 12

नये साल में छा गयी,अधरों पर मुस्कान ।
गौरी डूबा जश्न में , कर कर मदिरा पान ।। 13

यार सजाई महफिले,देख रह गया दंग ।
सुध बुध भूले बदन की,उड़ा रातभर रंग ।। 14 

बारह बजते ही चला, संदेशों का दौर ।
प्रियजन को देने लगे,हर पल का सिरमौर ।। 15
















बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अर्थव्यवस्था पर दोहा

मौजूदा हालत पर दोहा निवेदित \n०३/१२/२०१९ मंगलवार 

जीडीपी है न्यूनतम बृहद भुखमरी आज 
आलू सड़को पर पड़ा सर से महंगी प्याज 



रुपेश धनगर मथुरा 
9410490520